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T379_Shree Kumar Rastogi

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 "जब हम अपने नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों का हनन कर, पद और सत्ता के लोभ में फंस कर, चाटुकारों द्वारा निर्देशित विपरीत मार्ग को अंगीकार कर लेते है, तब तत्कालिक लाभ तो अवश्य दिखता है, परंतु कालान्तर में यही लाभ समूल नाश का कारक होता है।" Translated in English  "When we adopt the opposite path guided by the sycophants, by sacrificing our moral values ​​and principles, getting entangled in the greed of position and power, then there is an immediate benefit, but in the long run this benefit will be the factor of total destruction. Is."

T378_Shree Kumar Rastogi

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 " समाज द्वारा अपने हेतु की जा रही आलोचनाओं पर यदि हम स्वयं को केन्द्रित कर लेते है, तो हम मानसिक रूप से असंतुलित हो अपने विकास को विराम दे देते है, इसी के विपरीत जब हम इन आलोचनाओं को नज़र अंदाज़ कर  देते है, तो दिन प्रतिदिन विकास की नई नई ऊंचाइयों को छूते हैं।" Translated in English  "If we focus ourselves on the criticisms being made by the society for ourselves, then we become mentally unbalanced and stop our development, on the contrary, when we ignore these criticisms, then day by day reach new heights of development."

T377_Shree Kumar Rastogi

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"प्रत्येक जीवन इस धरा पर नियति के नियमानुसार किसी विशेष प्रयोजन की संकल्पना को मूर्त रूप देने हेतु संकल्पित हो जन्म लेता है।  जीव जब जगत की माया से एकाकार हो उसमे विचरण करता है तो अपनी संकल्पित संकल्पना से दिग्भ्रमित हो जाता है इसी कारण उसे समय समय पर गतिरोधों का सामना करना पड़ता है।  इन गतिरोधों से मुक्ति का बस एक ही उपाय है कुछ समय ध्यान की अवस्था में रहकर अपना आत्मवलोकन करना एवम् नियति ने हमें जीवन क्यों दिया इसकी विवेचना करना।  जब जीवन के लक्ष्य और उद्देश्य स्पष्ट हो जाए तो कम से कम वर्ष में एक बार अपने इन संकल्पों पर ध्यानस्थ हो ताकि अपने लक्ष्य से हम कभी भी विचलित न हो। यह एक दिन हम अपने पृथ्वी पर अपने प्रदुर्भाव दिवस को ही चुन सकते है इससे हमारा जन्म और लक्ष्य जीवन भर स्पष्ट रहेंगे।" Translated in English  "Every life is born on this earth determined to give shape to the concept of a particular purpose according to the rules of destiny. When a living entity is united with the Maya of the world and moves in it, he gets confused by his conceived concept, that is...

T376_Shree Kumar Rastogi

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 " पंचायतन, महामारू, काइंगा और भूमिज   मंदिर निर्माण की नागर शैली की उपशैलियां है। पंचायतन विशिष्ट शैली है इसके नाम की उत्पत्ति संस्कृत शब्द पंच (पांच) और आयतन (मुक्त) से हुआ है।इसमें एक मुख्य मंदिर तथा उसके चारों ओर चार गौण मंदिरों को स्थापित किया जाता था  गुर्जर-प्रतिहारों के द्वारा क्षेत्रीय मंदिर स्थापत्य शैली का विकास किया गया जिसे महामारू शैली कहा गया। इस शैली का विस्तार मरू प्रदेश से लेकर आभानेरी, चित्तौड़, उत्तरी मेवाड़, उपरमाल पट्‌टी तक हुआ। इस शैली के प्रारम्भिक उत्कर्ष काल में चित्तौड़, आभानेरी एवं ओसियां प्रमुख हैं। काइंगा वास्तुकला शैली ऐसी शैली है जो प्राचीन कालिंग क्षेत्र या ओडिशा, पूर्वी बंगाल और उत्तरी आंध्र प्रदेश के पूर्वी भारतीय राज्य में विकसित हुई है। इस शैली में तीन अलग-अलग प्रकार के मंदिर होते हैं: रेखा देला, पिधा देवला और खखारा देवला।" Translated in English  "Panchayatan, Mahamaru, Kainga and Bhumij are the sub-styles of Nagara style of temple construction. Panchayatan is a distinctive style, its name is derived from the Sanskrit words P...

T375_Shree Kumar Rastogi

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  "वेसर शैली के अंतर्गत मंदिरों का निर्माण विंध्य पर्वतमाला से कृष्णा नदी तक 7वीं शताब्दी से 12वीं शताब्दी के मध्य हुआ। यह भी कहा जा सकता है इस शैली का निर्माण क्षेत्र मध्य भारत और कर्नाटक का भौगोलिक क्षेत्र है।  इस शैली में मंदिरों का निर्माण मुख्यत: चालुक्य और होयसला राजवंशों ने किया। इस शैली में मंदिरों का निर्माण नागर और द्रविण शैली को मिला कर किया जाता है इसीलिए इसे मिश्रित शैली भी कहते है।  इस शैली के मंदिरों के शिखर नागर शैली में और मंडप द्रविड़ शैली में निर्मित होते है। इस शैली में मंदिरों का निर्माण गोलाकार या अर्द्ध गोलाकार रूप में किया जाता है जो इनकी अद्भुत स्थापत्य कला का एक नमूना हैं।  वेसर शैली के प्रमुख मंदिरों में ऐहोल को मंदिर बेलूर का द्वार समुद्र मंदिर, सोमनाथपुरम का मंदिर वृंदावन का वैष्णव मंदिर एलोरा का कैलाश मंदिर आदि प्रमुख है।" Translated in English  "The temples under the Vesara style were built from the Vindhya ranges to the Krishna river between the 7th century and the 12th century. It can also be said that th...

T374_Shree Kumar Rastogi

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 द्रविड़ शैली में दक्षिण भारत के मंदिरो का निर्माण 8वीं शताब्दी से लेकर 16वीं शताब्दी तक दक्षिण भारतीय राजवंशों जैसे चोल, चालुक्य, चेर, पंड्या, गंग, कदंब, राष्ट्रकूट, होयसला ने प्रमुखता से करवाया। द्रविड़ शैली में तमिलनाडु, आंध्र, केरल, कर्नाटक के साथ - साथ श्रीलंका में भी मंदिरों का निर्माण हुआ।  इस शैली के मंदिरों का आधार वर्गाकार होता है, ऊपर का शिखर पिरामिड नुमा होता है। पूरा मंदिर एक चारदीवारी से घिरा होता है, और सामने एक द्वार होता है, जिसे गोपुरम कहते है। मंदिर प्रांगण में दीप स्तंभ एवम् ध्वजा स्तंभ भी होने का विधान द्रविड़ शैली के मंदिरों में है। इस शैली के प्रमुख मंदिरों में तंजौर का राजराजेश्वर मंदिर, बृहदेश्वर मंदिर, श्रीरंगम का वैष्णव मंदिर, एलोरा का कैलाश मंदिर, मीनाक्षी देवी मंदिर, रामेश्वरम मंदिर इस शैली के प्रमुख मंदिरों में से एक है जो आज तक अपनी स्थापत्य कला की अप्रीतम छठा से शोभायमान हो रहे है। Translated in English  "South Indian dynasties like Cholas, Chalukyas, Cheras, Pandyas, Gangas, Kadambas, Rashtrakutas, Hoysalas built temples in the Dravidian s...

T373_Shree Kumar Rastogi

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  "नागर शैली के मंदिरों का निर्माण मुख्य रूप से 8वीं से 13वीं शताब्दी के मध्य के राजवंशों ने हिमालय से लेकर विंध्य तक के क्षेत्र यानी उत्तर भारत में कराया। नागर शैली में मंदिरों का निर्माण विशिष्ट योजना एवम् विमान को दृष्टि में रखकर किया जाता था।  इसकी मुख्य भूमि आयताकार तथा मध्य के दोनों ओर क्रमिक विमान होते है, जिसके कारण मंदिर का आकार तिकोना हो जाता है, यह एक चतुष्कोणीय संरचना होती है। मंदिर में शीर्ष पर शिखर होता है। मंदिर में दो भाग होते है, एक गर्भगृह और दूसरा मंडप कहलाता है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण इसी शैली में हो रहा है।" Translated in English  “Nagar style temples were built mainly by dynasties from the middle of 8th to 13th century in the region from Himalayas to Vindhyas i.e. North India. Temples in Nagara style were constructed keeping in view the specific plan and vimana. Its main land is rectangular and there are successive vimanas on either side of the center, due to which the shape of the temple becomes triangular, it is a quadrangular struct...

T372_Shree Kumar Rastogi

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  "भारतीय स्थापत्य कला और संस्कृति को अक्षुण्य रखने में हमारे मंदिरो की महती भूमिका है, भारत में भौगोलिक दृष्टिकोण से क्षेत्रवार मुख्यत: मंदिर स्थापत्य कला की तीन शैलियां है। नागर, द्रविड़ और बेसर शैली।"  Translated in English  "Our temples have an important role in keeping Indian architecture and culture intact, there are mainly three styles of temple architecture in India from the geographical point of view. Nagara, Dravidian and Besar style." 

T371_Shree Kumar Rastogi

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 "इतिहास गवाह है, जिसने भी अपनी जड़ों को पकड़ कर रखा, वह अनेकों झंझावतों से गुजरने के बाद भी अपने मूल अस्तित्व में बना रहा, इसके विपरीत जिसके जड़ों को छोड़ दिया, न तो उसका अस्तित्व बचा और न ही उसकी संस्कृति।" Translated in English  "History is witness, whoever held on to his roots, remained in his original existence even after going through many upheavals, unlike the one who left his roots, neither his existence nor his culture."

🧵T370_Shree Kumar Rastogi

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"योग मानसिक और आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत करने तथा एक स्वास्थ जीवन जीने की पद्धति का नाम है। योग का शब्दिक अर्थ होता है जुड़ना! अर्थात मनुष्य की चेतना को ब्रह्मांड की चेतना से जोड़ना ही योग की मूल अवधारणा है। योग एक ऐसा आंतरिक विज्ञान है, जिसके माध्यम से मनुष्य अपने मस्तिष्क के साथ-साथ अपनी जीवन शैली को भी अपने वश में रख सकता है।   इस सृष्टि में योग का अस्तित्व इस सृष्टि के आरंभ से ही है। योग के प्रमाण हमें सिंधु घाटी सभ्यता में भी देखने को मिले है।   यह बात निर्विवाद रूप से सत्य है, कि योग का अस्तित्व इस धरा पर किसी भी धर्म, संप्रदाय या आस्था के जन्म लेने के पूर्व से ही है। योग विद्या में इस जगत के पहले योगी या गुरु के रूप अनादि शिव को ही माना जाता है। ऐसी मान्यता है, कि अनादि शिव ने ही योग की संकल्पना को इस जगत को दिया।   वैदिक काल में सूर्य को सबसे अधिक महत्व दिया गया, इसी का परिणाम है, कि सूर्य नमस्कार प्राणायाम दैनिक संस्कार का हिस्सा बना। महान संत महार्षि पतंजलि ने अपने योग सूत्र के माध्यम से योग की विचारधारा को समाज में सुदृढ़ तरीके से स्थापित किया। वास्तव में योग ...